Budget 2021 में Liquor पर लगा 100 प्रतिशत सेस

 

ई दिल्ली: बजट 2021 में निर्मला सीतारमण ने कई बड़े ऐलान किए. ऐसे में एक ऐलान शराब को लेकर भी किया गया. शराब पर 100 प्रतिशत तक सेस लगा दिया गया है. ऐसे में शराब अब महंगा होगा या ज्यों का त्यों रहेगा इस बारे में आज हम आपको गणित समझाने वाले हैं. क्योंकि अगर शराब पर 100 प्रतिशत तक सेस लगाया जाता है तो यकीनन शराब काफी महंगा हो जाएगा. ऐसे में राज्यों को होने वाली आय पर इसका बुरा असर पड़ेगा. बता दें कि यह सेस केवल शराब पर नहीं बल्कि उन उत्पादों पर भी लगा है जिनमें Alcohol की मात्रा है. हालांकि इस सेस को लागू करने में एक गणित भी है.


शराब पर 100 प्रतिशत सेस लागू किए जाने केबाद भी यह महंगा नहीं होने वाला है. क्योंकि सरकार ने Alcoholic Beverage पर 100 प्रतिशथ कस्टम ड्यूटी को घटा दिया है. बता दें कि कस्टम ड्यूटी के घटाए जाने के बाद नए वित्तीय वर्ष में कुछ खास असर Alcoholic Beverage पर नहीं पड़ने वाला है




इससे पहले Import की गई शराब पर 150 फीसदी कस्टम ड्यूटी थी. हालांकि इसे 2021-22 के बजट के लिए कस्टम ड्यूटी को 100 फीसदी तक घटा दिया गया है. ऐसे में अब 80 फीसदी तक एल्कोहल वाली शराब पर केवल 50 फीसदी ही कस्टम ड्यूटी सरकार वसूलेगी. खबरों की मानें तो इसी तरह का फॉर्मूला सभी तरह के शराब पर लागू की जाएगी, जिससे शराब की कीमतें नहीं बढ़ेंगी.

इससे पहले Import की गई शराब पर 150 फीसदी कस्टम ड्यूटी थी. हालांकि इसे 2021-22 के बजट के लिए कस्टम ड्यूटी को 100 फीसदी तक घटा दिया गया है. ऐसे में अब 80 फीसदी तक एल्कोहल वाली शराब पर केवल 50 फीसदी ही कस्टम ड्यूटी सरकार वसूलेगी. खबरों की मानें तो इसी तरह का फॉर्मूला सभी तरह के शराब पर लागू की जाएगी, जिससे शराब की कीमतें नहीं बढ़ेंगी.


EPF News: कर्मचारी का हिस्‍सा देर से जमा करने वाले नियोक्ता नहीं कर पाएंगे इनकम टैक्स डिडक्शन का दावा

EPF News: कर्मचारी का हिस्‍सा देर से जमा करने वाले नियोक्ता इनकम टैक्स डिडक्शन का दावा नहीं कर पाएंगे.



इससे संस्‍थानों/कंपनियों पर कर्मचारी के पीएफ कॉन्ट्रिब्‍यूशन (PF Contribution) को समय से जमा करने का दबाव बढ़ेगा. इससे यह तय होगा कि इस पैसे का इस्‍तेमाल संस्‍थान दूसरे कामों में नहीं कर पाएंगे. यही नहीं, इस रकम पर मिलने वाले ब्‍याज (Interest on PF) का नुकसान भी कर्मचारियों को नहीं झेलना पड़ेगा. इस संबंध में वित्त विधेयक 2021 में एक संशोधन का प्रस्ताव किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संस्‍थान अपने कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा योगदान को समय पर जमा करें.




निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि इसका मतलब कर्मचारियों के लिए ब्याज या आय में कमी है. जिन मामलों में संस्‍थान की वित्तीय हालत बाद में खराब हो जाती है, उनके द्वारा जमा नहीं की गई राशि के रूप में कर्मचारियों को स्थायी तौर पर नुकसान उठाना पड़ता है. वित्त मंत्री ने लोकसभा (Loksabha) में कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कर्मचारियों के अंशदान को समय पर जमा किया जाए, मैं दोहराती हूं कि संस्‍थान की ओर से कर्मचारियों के कॉन्ट्रिब्‍यूशन को देर से जमा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

इस संबंध में बदलाव एक अप्रैल 2021 से प्रभावी हो जाएगा. वित्‍त वर्ष 2020-21 का आईटीआर फाइल करने वाली कंपनियों पर यह‍ नियम लागू होगा.

जानकारों का मानना है कि वित्त मंत्री के प्रस्तावित प्रावधान से कर्मचारियों को ज्‍यादा सुरक्षा मिलेगी. साथ ही इससे यह सुनिश्चित होगा कि कंपनी समय से उनके कॉन्ट्रिब्‍यूशन को पीएफ में जमा करें. साथ ही इस नए प्रावधान से कर्मचारियों को यह किसी संभावित नुकसान से भी बचाएगा.

जानें- ईपीएफ डिपॉजिट (EPF Deposit) पर कैसे किया जाता है ब्‍याज का कैलकुलेशन?

ईपीएफ स्‍कीम (EPF Scheme) के तहत अप्रैल 2020 के लिए संस्‍थान को ईपीएफ कॉन्ट्रिब्‍यूशन (EPF Contribution) 15 मई 2020 तक जमा करना पड़ता है. एक बार पैसा जमा हो जाने पर इस कॉन्ट्रिब्‍यूशन पर एक जून 2020 से ब्‍याज मिलना शुरू हो जाएगा.

गौरतलब है कि संस्‍थान की ओर से ईपीएफ कॉन्ट्रिब्‍यूशन जमा करने में देरी और इसे नहीं जमा करने को लेकर नियम अलग-अलग हैं. अगर संस्‍थान अप्रैल 2020 के लिए ईपीएफ कॉन्ट्रिब्‍यूशन जमा करने में देर करता भी है तो कर्मचारी को ब्‍याज 1 जून 2020 से ही मिलेगा. वहीं, आर्थिक समस्‍या के कारण अगर संस्‍थान इसे जमा ही नहीं करता है तो उस अवधि के लिए कर्मचारी को अपने पीएफ खाते पर कोई ब्‍याज नहीं मिलता है.

इसके अलावा एक अप्रैल 2021 से 2.5 लाख रुपये से अधिक सालाना पीएफ कॉन्ट्रिब्‍यूशन पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्‍स का प्रस्ताव है. इस समय पीएफ डिपॉजिट पर मिले ब्याज पर कोई टैक्‍स नहीं है. सरकार ने अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों की पहचान के लिए एक वेब पोर्टल बनाने का प्रस्ताव भी किया है, ताकि उन्हें स्वास्थ्य, कर्ज और भोजन जैसे विभिन्न लाभ दिए जा सकें.

भारतीय वित्तीय बजट 2021. बाजार पर इसका क्या प्रभाव है? वित्तीय बजट 2021 का लाभ? वित्तीय बजट 2021 का नुकसान

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