Vasant panchami 2021

 

बसंत पंचमी 2021 निबंध,महत्त्व,कविता|


Vasant panchami vivah muhurat 2021
Vasant panchami Saraswati pooja 2021

वसंत पंचमी उत्सव भारत के पूर्वी क्षेत्र में बड़े उत्साह से मनाया जाता हैं, इसे सरस्वती देवी जयंती के रूप में पूजा जाता हैं, जिसका महत्व पश्चिम बंगाल में अधिक देखने मिलता हैं . बड़े पैमाने पर पुरे देश में सरस्वती पूजा अर्चना एवम दान का आयोजन किया जाता हैं . इस दिन को संगीत एवम विद्या को समर्पित किया गया हैं . माँ सरस्वती सुर एवम विद्या की जननी कही जाती हैं इसलिये इस दिन वाद्य यंत्रो एवम पुस्तकों का भी पूजन किया जाता हैं .

Vasant panchami 2021 में कब  हैं ? (Vasant Panchami Date and Timing )

यह दिवस हिंदी पंचांग के अनुसार माघ महीने की पंचमी तिथी को मनाया जाता हैं, इस दिन से वसंत ऋतू का प्रारम्भ होता हैं . प्राकृतिक रूप में भी बदलाव महसूस होता है. इस दिन पतझड़ का मौसम खत्म होकर हरियाली का प्रारम्भ होता हैं . अंग्रेजी पंचांग के अनुसार यह दिवस जनवरी – फरवरी माह में मनाया जाता हैं . 

Basant Panchami Poem/ Kavita

बसंत पंचमी की तारीख16 फरवरी
बसंत पंचमी पूजा मुहूर्त12:26 से 12:41
कुल समय15 मिनट

भारत में कई त्यौहार मनाये जाते हैं, जो न केवल एक उत्सव होते हैं, बल्कि पर्यावरण में आने वाले बदलाव के सूचक भी होते हैं . हिंदी पंचाग की तिथीयाँ अपने साथ मौसमी बदलाव का संकेत भी देती हैं जो कि पुर्णतः प्राकृतिक होते हैं . उन्ही त्यौहारों में एक त्यौहार है वसंत पंचमी .


वसंत ऋतू के मुख्य त्यौहार (Vasant ritu Main Festival):

1तिल चतुर्थी
2शष्ठिला एकादशी
3मौनी अमावस्या
4गुप्त नवरात्रि आरंभ
5गणेश जयंती
6वसंत पंचमी 2021
7नर्मदा जयंतीभानु सप्तमी
8जया एकादशी
9गुरु रविदास जयंती, ललिता जयंती, माघ पूर्णिमा
10यशोदा जयंती
11शबरी जयंती
12जानकी जयंती
13विजिया एकादशी
14महाशिवरात्रि
15होली 2021
16रंग पंचमी
17पाप मोचिनी एकादशी
18गुड़ी पड़वा
19कामदा जयंती

Vasant panchami puja
Vasant Panchami Puja

वसंत ऋतू पंचमी महत्व (Vasant Panchami Importance in Hindi)

वसंत पंचमी माघ के महीने में आती हैं, इस दिन वसंत ऋतू का प्रारंभ होता हैं वंसत को ऋतू राज माना जाता हैं यह पूरा माह बहुत शांत एवम संतुलित होता हैं इन दिनों मुख्य पाँच तत्व (जल, वायु, आकाश, अग्नि एवम धरती ) संतुलित अवस्था में होते हैं और इनका ऐसा व्यवहार पृकृति को सुंदर एवम मन मोहक बनाता हैं अर्थात इन दिनों ना बारिश होती हैं, ना बहुत ठंडक और ना ही गर्मी का मौसम होता हैं, इसलिए इसे सुहानी ऋतू माना जाता हैं .

वसंत में सभी जगह हरियाली का दृश्य दिखाई पड़ता हैं . पतझड़ खत्म होते ही पेड़ों पर नयी शाखायें जन्म लेती हैं, जो प्राकृतिक सुन्दरता को और अधिक मनमोहक कर देती हैं .

वसंत पंचमी पौराणिक एवम एतिहासिक कथा (Vasant Panchami 2021 Katha/ Story)


वसंत पंचमी में सरस्वती पूजा महत्व (Vasat Panchami 2021 Sarasvati Puja Mahatav):

माघ की पंचमी जिस दिन से वसंत का आरम्भ होता हैं, उसे ज्ञान की देवी सरस्वती की जयंती के रूप में मनाया जाता हैं . मुख्यत पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य भारत, बिहार एवम पंजाब प्रान्त में मनाई जाती हैं .सरस्वती पूजन कर विधि विधान से सरस्वती वंदना के साथ वंसत पंचमी का उत्सव पूरा किया जाता हैं .

वसंत पंचमी ऋतू कविता (Vasant Panchami ritu Poem)

आई रे आई, ऋतुराज हैं आई,
चारों और वसंत बहार हैं छाई,
कोयल की कुंहूँ कुंहूँ फैली हैं बाग़ में,
पतझड़ बीता, बहारें छाई हैं बाग़ में,
भीनी- भीनी सी ठंडक लगती हैं सुहानी,
खेतो में लहराती सरसों और मक्का की बाली,
हर तरफ हैं सुर संगीत का वादन,
माता सरस्वती का संगीतमय अभिवादन,
ऐसी हैं वसंत ऋतू की सौगात,  
सजी हैं धरती पर सुहावनी बारात….

वसंत पंचमी कैसे मनाया जाती हैं? (Vasant Panchami Celebration)

वसंत पंचमी को एक मौसमी त्यौहार के रूप में भिन्न- भिन्न प्रांतीय मान्यता के अनुसार मनाया जाता हैं . कई पौराणिक कथाओं के महत्व को ध्यान में रखते हुए भी इस त्यौहार को मनाया जाता हैं

happy vasant panchami


बसंत पंचमी पर पीले रंग का क्या महत्व है

इस पावन दिवस पर देश में लगभग सभी शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थी गण मां शारदे की पूजा करते हैं और उनसे ज्ञानवान बनने की प्रार्थना करते हैं। इस पावन दिवस पर पीले रंग का अपना बहुत महत्व है और इस दिन पीला रंग फसलों के पकने का संकेत करता है। इस पर्व के दिन से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है और इस ऋतु में फूल खिलने शुरू हो जाते हैं। खेतों में सरसों के पौधे चमकने लगते हैं और साथ ही में जो और गेहूं की बालियां खिलने लगती है। इस पावन दिवस के दिन से ही रंग बिरंगी तितलियां इधर-उधर उड़ने लगती है और साथ में इस पावन पर्व को लोग ऋषि पंचमी के नाम से भी जानते हैं।

वसंत ऋतू का महत्व अधिक होता हैं यह ऋतू राज माना जाता हैं, इन दिनों प्रुकृतिक बदलाव होते हैं जो बहुत मन मोहक एवम सुहावने होते हैं. इस ऋतू में कई त्यौहार मनाये जाते हैं, जिनमे वसंत पंचमी के दिन इस ऋतू में होने वाले बदलाव को महसूस किया जाता हैं. अतः इस दिन को उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं . 

बसंत पंचमी का त्योहार 16 फरवरी 2021 को है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बसंत पंचमी का त्योहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान है। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करने वालों को विद्या और बुद्धि का वरदान मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। कहते हैं कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-

बसंत पंचमी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं-

1. बसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचना चाहिए।
2. इस दिन अपशब्दों व झगड़े से भी बचना चाहिए।
3. बसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहना चाहिए।
4. बसंत पंचमी के दिन पितृ तर्पण भी किया जाना चाहिए। 

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5. इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना बेहद जरूरी है।
6. बसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए।
7. इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। संभव हो तो पीले वस्त्र पहनने चाहिए।
8. बसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए।
9. बसंत पंचमी के दिन पितृ तर्पण भी किया जाना चाहिए। 

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त-

16 फरवरी को सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर पंचमी तिथि लगेगी, जो कि अगले दिन यानी 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी।

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बसंत पचंमी कथा: इस दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती-
 
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी।


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