आज की ताजा खबर, 15 मार्च 2021

 आज की ताजा खबर, 15 मार्च 2021:

 बड़ी खबरें और मुख्य समाचार





नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। सबड़े बड़ी सियासी लड़ाई बंगाल में है जहां ममता बनर्जी की टीएमसी की सामना भारतीय जनता पार्टी के साथ हो रहा है। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया है कि आजकल वह बार-बार क्यों नाराज हो जाते हैं। आज देश भर में करीब 10 लाख बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं, इससे बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। देश और दुनिया के आज के ताजा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार हैं-

तेजिंदर पाल सिंह बग्गा और कपिल मिश्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं है। ये दिल्ली बीजेपी यूनिट के कद्दावर नेता हैं। ये दोनों लोग अलग अलग विषयों पर अपनी राय भी रखते हैं।


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों अपने 'गुस्से' को लेकर सुर्खियों में हैं। विधानपरिषद में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक सदस्य पर उनकी नाराजगी मीडिया में एक बड़ा मुद्दा बना। 

 

डिजिटल दुनिया में सब कुछ कैशलेस हो चुका है, जाहिर है कि जब हम कैशलेस शब्द का जिक्र कर रहे हैं तो डेबिट( Debit Card) या क्रेडिट कार्ड्स दिल और दिमाग में बरबस आ जाते हैं। 

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को कहा कि  राजमार्ग-24 पर दिल्ली से गाजियाबाद की तरफ जाने वाली सड़क को खोल दिया गया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि गाजीपुर बॉर्डर पर कानून-व्यवस्था की स्थिति एवं आम लोगों की सुविधा को देखते हुए मार्ग खोला गया है। 



दो सरकारी क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण किए जाने के खिलाफ बैंक कर्मी आज और कल हड़ताल पर हैं, इससे देश भर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।


पश्चिम बंगाल चुनाव में राजनीतिक दलों के नेताओं की जुबां तीखी हो चली है। अलग अलग विशेषणों के जरिए एक दूसरे पर निशाना साधा जा रहा है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद ह्वील चेयर पर ममता बनर्जी ने रोड शो किया तो गृहमंत्री अमित शाह ने भी रोड शो के जरिए जवाब दिया।


मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया है उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से किसानों की बात सुनने की अपील की है। 


क्रिकेट के खेल के प्रति भारतीयों की दीवानगी की कोई हद मुकर्रर नहीं की जा सकती। यहां हर खाली पड़े मैदान को एक क्रिकेट पिच की तरह देखा जाता है, जहां बच्चों की दो टोलियां गेंद और बल्ले से खेलती दिखाई देती हैं।


2019 के अंत में और पिछले साल की शुरुआत में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देश के कई हिस्सों में जमकर बवाल हुआ था। लेकिन असम में इस कानून के खिलाफ बहुत ज्यादा विरोध प्रदर्शन हुए थे। 


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